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Chapter 1 - Unnamed

शीर्षक: अधूरी ज़िंदगी

रात के करीब 2 बजे थे। बाहर हल्की बारिश हो रही थी और कमरे के अंदर सिर्फ एक टेबल लैंप की पीली रोशनी जल रही थी। उस रोशनी के नीचे बैठा था आरव — एक ऐसा लड़का जिसकी ज़िंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी।

आरव की आँखों में नींद नहीं थी, बल्कि यादें थीं — कड़वी, दर्द भरी और कभी खत्म न होने वाली।

वो अपनी डायरी खोलकर बैठा था। हर पन्ने पर सिर्फ दर्द लिखा था। उसने पेन उठाया और लिखना शुरू किया —

"कुछ लोग जिंदगी में आते हैं सिर्फ ये सिखाने के लिए कि अकेलापन क्या होता है…"

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बचपन

आरव का बचपन बहुत साधारण था। उसके पिता एक छोटे से दुकान चलाते थे और माँ घर संभालती थीं। घर में पैसे ज्यादा नहीं थे, लेकिन प्यार बहुत था।

माँ हर सुबह उसे उठातीं, उसके बाल ठीक करतीं और कहतीं —

"तू बड़ा आदमी बनेगा बेटा।"

वो मुस्कुरा देता।

लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।

जब आरव सिर्फ 12 साल का था, एक सड़क हादसे में उसके पिता की मौत हो गई।

उस दिन से सब कुछ बदल गया।

माँ की आँखों की चमक गायब हो गई, घर की हँसी चुप्पी में बदल गई, और आरव अचानक बड़ा हो गया।

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संघर्ष

पिता के जाने के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया। माँ ने सिलाई का काम शुरू किया और आरव ने पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए।

स्कूल से लौटकर वो दुकान पर काम करता, रात को पढ़ाई करता।

उसके दोस्त खेलते थे, लेकिन आरव जिम्मेदारियों के बोझ में दब चुका था।

कभी-कभी वो सोचता —

"क्या मैं भी सामान्य जिंदगी जी सकता हूँ?"

लेकिन हर बार जवाब "नहीं" होता।

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प्यार

समय बीतता गया और आरव कॉलेज पहुँच गया।

वहीं उसकी मुलाकात हुई सिया से।

सिया… उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी।

सिया बहुत खुशमिजाज लड़की थी। उसकी हँसी में एक अजीब सुकून था।

धीरे-धीरे दोनों दोस्त बने और फिर वो दोस्ती प्यार में बदल गई।

आरव ने पहली बार जिंदगी में सुकून महसूस किया।

उसे लगा —

"शायद अब सब ठीक हो जाएगा।"

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टूटना

लेकिन जिंदगी इतनी आसान कहाँ होती है।

सिया एक अमीर परिवार से थी और आरव… एक संघर्ष करता हुआ लड़का।

जब सिया के घरवालों को उनके रिश्ते के बारे में पता चला, उन्होंने साफ मना कर दिया।

"ये लड़का तुम्हें खुश नहीं रख सकता।"

सिया ने बहुत कोशिश की, लेकिन परिवार के दबाव के आगे वो हार गई।

एक दिन उसने आरव से कहा —

"मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… लेकिन मैं अपने परिवार के खिलाफ नहीं जा सकती।"

उस दिन आरव अंदर से टूट गया।

उसने बस इतना कहा —

"कोई बात नहीं… खुश रहना।"

लेकिन उसके बाद उसकी जिंदगी से खुशियाँ हमेशा के लिए चली गईं।

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अकेलापन

सिया के जाने के बाद आरव पूरी तरह बदल गया।

वो अब कम बोलता था, ज्यादा सोचता था।

उसकी मुस्कान गायब हो गई थी।

माँ उसे देखती थीं, लेकिन कुछ समझ नहीं पाती थीं।

आरव रात-रात भर जागता और छत को देखता रहता।

उसके मन में बस एक सवाल था —

"क्यों?"

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एक और झटका

जिंदगी ने उसे एक और चोट दी।

एक दिन माँ को हार्ट अटैक आया।

आरव उन्हें अस्पताल लेकर भागा, लेकिन इस बार भी किस्मत उसके साथ नहीं थी।

माँ भी उसे छोड़कर चली गईं।

अब वो पूरी तरह अकेला था।

कोई नहीं था उसका।

न परिवार, न प्यार।

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ज़िंदगी का बोझ

अब आरव एक छोटी सी नौकरी करता था।

सुबह ऑफिस, शाम को खाली कमरा।

कोई बात करने वाला नहीं, कोई इंतजार करने वाला नहीं।

उसकी जिंदगी बस चल रही थी… बिना किसी मकसद के।

वो अक्सर सोचता —

"क्या यही जिंदगी है?"

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डायरी

वो अपनी डायरी में लिखता रहता था।

एक दिन उसने लिखा —

"मैं थक गया हूँ… जिंदगी से, लोगों से, खुद से।"

"हर चीज़ अधूरी रह गई… सपने, प्यार, परिवार…"

"अब कुछ भी बचा नहीं है।"

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आखिरी रात

उस रात भी बारिश हो रही थी।

बिल्कुल वैसे ही जैसे आज हो रही थी।

आरव ने अपनी डायरी का आखिरी पन्ना खोला और लिखा —

"अगर जिंदगी एक किताब है, तो मेरी कहानी अधूरी ही सही… लेकिन खत्म होनी चाहिए।"

उसने पेन रखा, आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली।

कमरे में सन्नाटा था।

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अगली सुबह

सुबह जब दरवाज़ा नहीं खुला, तो पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया।

दरवाज़ा तोड़ा गया।

अंदर आरव था… बिल्कुल शांत।

टेबल पर उसकी डायरी खुली हुई थी।

आखिरी लाइन लिखी थी —

"मैं बस थोड़ा सा खुश होना चाहता था…"

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अंत

कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं।

कुछ लोग हमेशा के लिए अधूरे रह जाते हैं।

आरव भी उनमें से एक था।

उसकी जिंदगी खत्म हो गई… लेकिन उसका दर्द उन पन्नों में हमेशा के लिए रह गया।

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सीख:

कभी-कभी लोग बाहर से ठीक दिखते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूटे होते हैं।

इसलिए हमेशा अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखें — क्योंकि एक मुस्कान के पीछे भी बहुत दर्द छुपा हो सकता है।