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Chapter 1 - Meri Zindagi Part 3

अंधेरे में कौन था…?

हम सब वापस लौट रहे थे।

समय लगभग सुबह के चार बजे हो चुके थे, लेकिन अजीब बात यह थी कि अंधेरा अभी भी कम नहीं हुआ था।

चारों तरफ घना कोहरा था और ठंडी हवा चल रही थी। उस समय ऐसा लग रहा था जैसे हम गर्मी में नहीं बल्कि सर्दियों की रात में चल रहे हों।

हम सब तेज़-तेज़ कदमों से वापस जा रहे थे, क्योंकि उस सुनसान जगह पर अब हमें बहुत डर लगने लगा था।

अचानक मेरे दोस्त सूरज ने धीरे से कहा,

"तुम लोगों ने सुना…? पीछे से किसी के कदमों की आवाज़ आ रही है।"

हम सब तुरंत रुक गए।

चारों तरफ गहरा सन्नाटा था।

न कोई आदमी… न कोई गाड़ी… सिर्फ हवा की आवाज़।

मैंने धीरे से पीछे मुड़कर देखा।

और जैसे ही मैंने पीछे देखा…

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

कोहरे के बीच वही आदमी खड़ा था, जिसे हमने पहले सड़क पर देखा था।

लेकिन इस बार वह बहुत दूर नहीं था…

वह हमसे सिर्फ कुछ ही दूरी पर खड़ा था।

उसका चेहरा अभी भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

सिर्फ उसका काला सा साया कोहरे में दिख रहा था।

मैंने घबराकर अपने दोस्तों से कहा,

"वो… वही आदमी है… वही जो पहले गायब हो गया था…"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता,

वह आदमी अचानक हमारी तरफ दौड़ने लगा।

हम सब डर के मारे तेज़ दौड़ने लगे।

दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि ऐसा लग रहा था जैसे अभी बाहर आ जाएगा।

तभी अचानक पीछे से आवाज़ आई —

"रुको…!"

हमने पीछे मुड़कर देखा तो लड्डू जमीन पर गिर पड़ा था।

वह उठने की कोशिश कर रहा था, लेकिन डर के मारे उसका शरीर कांप रहा था।

और सबसे डरावनी बात यह थी कि…

वह आदमी अब लड्डू के बिल्कुल पीछे खड़ा था।

हम सब कुछ पल के लिए जम गए।

कोहरे के बीच वह आदमी धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठा रहा था…

और तभी…

उसकी आँखें चमकने लगीं।

हम सबकी चीख निकल गई।

लेकिन असली डर तो अभी शुरू होने वाला👉 Part 4 जल्दी आने वाला है… 😱

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