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Chapter 1 - Meri Zindagi Part 4

कोहरे में छुपा राज

हम सब डर के मारे कुछ पल के लिए वहीं खड़े रह गए।

कोहरा इतना घना था कि हमें ठीक से कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था।

लड्डू जमीन पर गिरा हुआ था और उसके पीछे वही अजीब आदमी खड़ा था।

हम सबकी साँसें तेज़ हो रही थीं।

दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि ऐसा लग रहा था जैसे सीने से बाहर निकल आएगा।

मैंने हिम्मत करके चिल्लाकर कहा,

"लड्डू… जल्दी उठ और हमारी तरफ भाग!"

लड्डू ने डरते हुए पीछे मुड़कर देखा।

जैसे ही उसने उस आदमी को देखा, उसका चेहरा पीला पड़ गया।

वह जल्दी से उठकर हमारी तरफ भागने लगा।

लेकिन तभी अचानक अजीब सी हवा चलने लगी।

कोहरा और भी घना हो गया।

हम सबको ऐसा लग रहा था जैसे कोई हमें घूर रहा हो।

तभी अचानक पीछे से हँसी की आवाज़ आई…

वह हँसी बिल्कुल इंसानों जैसी नहीं थी।

वह बहुत धीमी और डरावनी थी।

हम सबने एक साथ पीछे मुड़कर देखा।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था…

वह आदमी अचानक गायब हो चुका था।

अब डर और भी बढ़ गया था।

मेरे दोस्त सूरज ने कांपती आवाज़ में कहा,

"मुझे लगता है… हमें यहाँ से तुरंत निकल जाना चाहिए…"

हम सब बिना कुछ बोले तेज़ दौड़ने लगे।

दौड़ते-दौड़ते हम आखिरकार मुख्य सड़क तक पहुँच गए।

जैसे ही हम सड़क पर पहुँचे,

कोहरा अचानक कम होने लगा और आसमान थोड़ा साफ दिखने लगा।

हम सबने राहत की साँस ली।

लेकिन तभी…

आलोक ने धीरे से कहा,

"एक मिनट… अगर वो आदमी इंसान था…

तो फिर वो इतनी जल्दी गायब कैसे हो गया…?"

उसकी बात सुनकर हम सब फिर से खामोश हो गए।

क्योंकि सच में…

जो हमने उस सुबह देखा था, वह आज तक हमें समझ नहीं आया… agar lahani pasand aayi to comment karna mat bhulna guys like bhi karna

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