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Chapter 1 - Exam hall bna khet

Chapter 1: exam hall ka mahaul

Exam की घंटी बजी…

ऊपर से सब शांत थे…

लेकिन अंदर?

इतनी हलचल कि अगर कोई सुन ले तो कान के परदे फट जाएं

मैं exam hall में बैठाखास दोस्त बैठा करता था…

वो खास इसलिए था… क्योंकि मैं उसी के सहारे हर बार pass होता था

वो नहीं होता तो पता नहीं मैं किसके भरोसे नकल करता

किसी तरह पहले exams निकल गए…

मैं pass भी हो गया

समय बीता…

और फिर एक दिन… वही school

वही hall

वही exam

लेकिन इस बार… किस्मत बदल गई

मेरी आंखें फटी कि फटी रह गई मानो पैरो तले से जमीन खिसक गई हो ....

जिसके सहारे मैं हर बार pass होता था…

वो सबसे आगे बैठा था

और मैं… सबसे पीछे

अब मन में बस एक ही सवाल था—

"अब नकल कैसे मारूं?"

ऐसा लग रहा था जैसे ये exam नहीं…

aar ya paar की लड़ाई हो

मेहनत वाला रास्ता तो मैं पहले ही छोड़ चुका था

अब बस एक ही रास्ता बचा था…

कुछ ऐसा करने का… जिसकी किसी ने कल्पना भी ना की हो ???

*Chapter 2: Operation Start*

Paper शुरू हुआ…

सब अपने paper में busy…

और मैं…

गर्दन नीचे… आँखें तिरछी…

पूरे hall को scan कर रहा था

तभी मौका मिला…

Sir बाहर गए…

मैं दौड़ा

आगे वाली लड़की की copy उठाई…

और उसकी जगह खाली copy रख आया

फिर एक और round copy safely वापस पहुंचा दी

लड़की ने राहत की सांस ली…

और मैंने भी

* chapter 3: khet Vali aavaj*

असली खेल शुरू

अब distance ज्यादा था…

तो simple signal काम नहीं आने वाला था

इसलिए मैंने चालू किया…

"Khet Style Communication"

अचानक जोर से चिल्लाया—

"ओएएए… दूसरोssss बता!!!"

पूरे hall में सन्नाटा…

फिर अंदर ही अंदर हँसी का blast

Sir अंदर आए…

गुस्सा + confusion

"ये कौन है?? ये exam hall है… मुर्गों का बाड़ा नहीं!"

सब चुप…

पर हँसी रोक नहीं पा रहे थे

Sir जैसे ही फिर बाहर मुड़े…

मैंने फिर चिल्लाया—

"ओएएए… सातवोssss!!"

अब तो हालत और खराब

Sir का माथा घूम गया

"ये आखिरी बार पूछ रहा हूँ… कौन है??

ये कोई खेत नहीं है…

जो ऐसे आवाज लगा रहे हो जैसे पापा को चाय के लिए बुला रहे हो!"

तीसरी बार (Final)

अब exam खत्म होने वाला था…

लेकिन मैं रुकने वालों में से नहीं था

फिर एक बार…

पूरे confidence के साथ…

"ओएएए… सातवोssss!!"

सच्चाई

पूरे hall में suspense था—"ये है कौन??"

और वो "महान शख्स"…

मैं खुद था!!!

*Chapter 4: Ending Scene*

जब हम बाहर आए…

एक ही चर्चा थी—

"वो आवाज किसकी थी?"

नाम किसी ने नहीं लिया…

पर इशारों में सब समझ गए

दोस्त बोले—

"एक दिन तू हमें पक्का मरवाएगा!"

और मैं…

नीचे नजर… हल्की शैतानी मुस्कान

Last Moment (Best)

जैसे ही मैं बाहर निकला…

मेरी नजर Sir से मिली

उनकी आँखें जैसे कह रही हों—

"आवाज़ नहीं पहचानी…

पर तेरी शैतानी मुस्कान पहचान ली "

"Us din ke baad sabko pata chal gaya ki exam hall me bhi khet wali aawaaz aa sakti hai "

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