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Chapter 1 - “32वीं मंज़िल का भूत”

मुंबई की सबसे ऊँची इमारतों में से एक थी — ओबेरॉय स्काई टॉवर।

उसकी 32वीं मंज़िल पर बना पेंटहाउस हमेशा बंद रहता था।

लोग कहते थे वहाँ किसी की आत्मा रहती है।

लेकिन असली डरावनी बात यह थी कि उस मंज़िल का मालिक था — विवान कपूर, देश का सबसे युवा और रहस्यमयी CEO।

विवान के बारे में कई अफवाहें थीं।

कुछ लोग कहते थे उसकी पत्नी पाँच साल पहले मर गई थी।

कुछ कहते थे… उसने खुद उसे मारा था।

लेकिन कभी कोई सच जान नहीं पाया।

एक रात कंपनी में नई जॉइन हुई लड़की, अनन्या, को अचानक एक ईमेल मिला।

"Tonight. 11:30 PM.

32nd Floor.

Private Meeting with CEO."

अनन्या हैरान थी।

इतनी रात को मीटिंग?

लेकिन नौकरी नई थी, इसलिए मना भी नहीं कर सकती थी।

रात 11 बजे वह ओबेरॉय स्काई टॉवर पहुँची। बाहर तेज बारिश हो रही थी। पूरी बिल्डिंग लगभग खाली थी।

रिसेप्शन पर बैठे बूढ़े गार्ड ने उसे देखते ही घबराकर पूछा—

"तुम… 32वीं मंज़िल पर जा रही हो?"

"जी। CEO ने बुलाया है।"

गार्ड का चेहरा सफेद पड़ गया।

"अगर लिफ्ट बीच में रुक जाए… तो पीछे मुड़कर मत देखना।"

अनन्या हल्का सा हँस दी।

उसे लगा बूढ़ा मजाक कर रहा है।

लेकिन जैसे ही लिफ्ट ऊपर जाने लगी, अंदर का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया।

31…

32…

टिंग।

दरवाज़ा खुला।

सामने लंबा अंधेरा गलियारा था। सारी लाइट्स बंद थीं। सिर्फ आखिर में एक कमरे से हल्की पीली रोशनी आ रही थी।

अनन्या धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

अचानक उसके पीछे से किसी औरत की धीमी आवाज आई—

"मत जाओ…"

अनन्या तुरंत पलटी।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

वह जल्दी-जल्दी उस रोशनी वाले कमरे तक पहुँची और दरवाज़ा खोला।

कमरे के अंदर विवान कपूर खड़ा था।

ब्लैक सूट, ठंडी आँखें और हाथ में वाइन का गिलास।

"Welcome, Ananya."

"स… सर, आपने इतनी रात को क्यों बुलाया?"

विवान मुस्कुराया।

"क्योंकि कुछ बातें रात के अंधेरे में ही अच्छी लगती हैं।"

उसकी आवाज अजीब थी।

कमरे में चारों तरफ महंगी पेंटिंग्स लगी थीं। लेकिन एक पेंटिंग पर कपड़ा ढका हुआ था।

अनन्या की नजर बार-बार उसी पर जा रही थी।

तभी अचानक कमरे की लाइट्स टिमटिमाने लगीं।

फिर…

धप्प!

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

अनन्या डर गई।

"सर… लाइट चली गई!"

अचानक अंधेरे में किसी लड़की की हँसी गूंजी।

धीमी… डरावनी…

"हा… हा… हा…"

अनन्या की सांस रुक गई।

तभी बिजली वापस आई।

लेकिन अब विवान के पीछे दीवार पर खून से लिखा था—

"MURDERER"

अनन्या चीख पड़ी।

"ये… ये किसने लिखा?!"

विवान का चेहरा अचानक गुस्से से भर गया।

"वो फिर लौट आई…"

"क… कौन?"

विवान कुछ सेकंड चुप रहा।

फिर उसने धीरे से उस ढकी हुई पेंटिंग से कपड़ा हटाया।

अनन्या की आँखें फैल गईं।

पेंटिंग में एक बेहद खूबसूरत लड़की थी।

लाल साड़ी।

काली आँखें।

और गले पर खून का निशान।

"मेरी पत्नी… सिया।"

कमरे में अचानक बर्फ जैसी ठंड फैल गई।

अनन्या ने काँपते हुए पूछा—

"उसकी मौत कैसे हुई?"

विवान की आँखें नीचे झुक गईं।

"सबने कहा उसने आत्महत्या की…"

"लेकिन सच?"

विवान कुछ बोल पाता, उससे पहले कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

धड़ाम!

अनन्या डरकर पीछे हट गई।

और तभी…

आईने में किसी औरत की परछाई दिखाई दी।

सफेद चेहरा।

खून से भरी आँखें।

सिया।

अनन्या चीखने ही वाली थी कि अचानक आईने पर खून से शब्द उभरने लगे—

"सच बताओ…"

विवान काँप उठा।

"मैंने उसे नहीं मारा…" वह चिल्लाया।

अचानक कमरे की सारी चीजें हिलने लगीं। कुर्सियाँ अपने आप सरकने लगीं। खिड़कियाँ तेजी से खुलने-बंद होने लगीं।

सिया की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी—

"झूठ… झूठ…"

अनन्या रोने लगी।

"सर, मुझे यहाँ से जाने दीजिए!"

लेकिन तभी लिफ्ट अपने आप बंद हो गई।

मोबाइल नेटवर्क गायब।

बाहर तूफान और तेज हो चुका था।

विवान धीरे-धीरे जमीन पर बैठ गया।

"उस रात…" उसने टूटती आवाज में कहा, "मैंने सिया को धोखा दिया था।"

अनन्या चुपचाप सुनती रही।

"मेरा अफेयर मेरी बिजनेस पार्टनर रिद्धिमा के साथ था। सिया को सब पता चल गया था। उस रात उसने मुझे छोड़ने की बात कही।"

विवान की आँखों में डर साफ दिख रहा था।

"हम दोनों में बहुत लड़ाई हुई। फिर अचानक…"

उसकी आवाज रुक गई।

"फिर क्या हुआ?" अनन्या ने पूछा।

विवान कांपने लगा।

"मैंने गुस्से में उसे धक्का दिया…"

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।

"और उसका सिर टेबल से टकरा गया…"

अनन्या की आँखों से आँसू निकल आए।

"तो… उसकी मौत—"

"एक हादसा था!" विवान जोर से चिल्लाया।

लेकिन तभी पीछे से किसी लड़की की धीमी आवाज आई—

"नहीं… हत्या थी…"

दोनों ने धीरे-धीरे पीछे देखा।

सिया दरवाज़े के पास खड़ी थी।

लेकिन अब उसका चेहरा इंसानी नहीं था।

आँखों से खून बह रहा था। गर्दन टेढ़ी थी। और होंठों पर डरावनी मुस्कान।

अनन्या डर के मारे चीख पड़ी।

विवान पीछे हटने लगा।

"सिया… प्लीज़…"

सिया धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।

"तुमने मुझे मारा… और दुनिया से झूठ बोला…"

कमरे की लाइट्स तेजी से जलने-बुझने लगीं।

अचानक सिया गायब हो गई।

और अगले ही पल विवान हवा में उठ गया।

जैसे किसी ने उसका गला पकड़ लिया हो।

वह तड़पने लगा।

"बचाओ… बचाओ…"

अनन्या रोते हुए दरवाज़ा खोलने की कोशिश करती रही।

लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला।

फिर अचानक—

धड़ाम!

विवान जमीन पर गिरा।

उसकी आँखें खुली थीं…

लेकिन वह मर चुका था।

कमरे में फिर वही डरावनी हँसी गूंजी।

अनन्या किसी तरह दरवाज़ा खोलकर बाहर भागी।

लिफ्ट इस बार खुल गई।

वह नीचे पहुँची और बेहोश हो गई।

अगली सुबह पुलिस को 32वीं मंज़िल पर विवान कपूर की लाश मिली।

रिपोर्ट में लिखा गया—

"Heart Attack."

लेकिन असली डरावनी बात कुछ और थी।

सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दे रहा था—

रात 11:47 पर अनन्या कमरे में अकेली गई थी।

और पूरी रात…

कोई दूसरा अंदर गया ही नहीं।

तो फिर…

विवान को मारने वाला कौन था?

आज भी ओबेरॉय स्काई टॉवर की 32वीं मंज़िल बंद है।

और लोग कहते हैं—

बरसात की रातों में वहाँ से एक औरत की हँसी सुनाई देती है…।

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