Recap:
पिछले अध्याय में मैंने अपने बचपन की बातें बताई थीं। मैं बहुत शरारती और बहुत ज़्यादा बोलने वाला लड़का था। दोस्तों के साथ खेलना, मस्ती करना और फिर मम्मी-पापा की डाँट खाना — यही मेरी रोज़ की आदत थी।
मेरे घर वाले मुझे "चेंट" कहते थे, क्योंकि मैं बहुत बोलता था। मुझे लगता था कि ज़्यादा बोलना कोई बड़ी बात नहीं है।
लेकिन मुझे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरी यही आदत एक दिन मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बन जाएगी…
कहानी:
यह बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में था। अभी-अभी हमारी परीक्षाएँ खत्म हुई थीं और गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं।
मैंने तय कर लिया था कि इस बार की छुट्टियाँ मैं पूरी तरह अपने दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए बिताऊँगा।
एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ राम मंदिर में बैठा हुआ था। वह मंदिर अभी कुछ ही महीनों पहले बना था, इसलिए हर रात वहाँ पूजा होती थी।
उस रात पूजा खत्म होने के बाद हम सब वहीं बैठकर मज़ाक और बातें कर रहे थे।
जैसा कि आप जानते हैं, मैं बहुत ज़्यादा बोलता था। उसी दौरान मैंने मज़ाक-मज़ाक में एक बात कह दी —
"कल सुबह हम सब रनिंग पर चलेंगे।"
मेरे दोस्तों ने पूछा,
"कितने बजे?"
मैंने कहा,
"सुबह 3 से 4 बजे के बीच।"
मेरे साथ उस दिन आठ दोस्त थे —
सूरज, प्रियांशु, नेहा, लड्डू, श्रेया, सूर्यांश, आलोक और मैं।
सबने हँसते हुए कहा,
"ठीक है, कल चलते हैं।"
लेकिन मुझे क्या पता था कि मेरे इस एक फैसले से हमारी ज़िंदगी बदलने वाली है…
अगली सुबह हम सब साढ़े तीन बजे रनिंग के लिए निकले। शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक था।
दौड़ते-दौड़ते अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने कहा,
"क्यों न हम आगे वाले सरकारी स्कूल की तरफ चलें? वह स्कूल काफी समय से बंद पड़ा है।"
दोस्तों ने कहा,
"चलो, देखते हैं।"
जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे थे, कोहरा बढ़ता जा रहा था और ठंड भी अजीब तरह से बढ़ रही थी।
मैंने सोचा —
"गर्मी के मौसम में इतनी ठंड कैसे हो सकती है?"
ऐसा लग रहा था मानो गर्मी नहीं, सर्दी का मौसम हो।
लेकिन मैंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और हम आगे बढ़ते गए।
थोड़ी दूर जाने के बाद हमने देखा कि चारों तरफ अजीब सा अंधेरा था और एक भी सड़क की लाइट नहीं जल रही थी।
अचानक हमने देखा कि सड़क के बीच में एक आदमी खड़ा है।
हमने सोचा शायद कोई और भी रनिंग कर रहा होगा।
मेरे दो दोस्त उसे देखने के लिए आगे बढ़े। तभी अचानक वह आदमी गायब हो गया।
मैंने सोचा शायद वह आगे चला गया होगा।
लेकिन कुछ ही पल बाद मैंने देखा कि वही आदमी अब हमारे पीछे दौड़ रहा था।
यह देखकर हम सबकी रूह काँप गई…
कोहरा इतना ज्यादा था कि उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था।
मैंने अपने दोस्तों को यह बात बताई, लेकिन उन्होंने मेरी बात को मज़ाक समझकर टाल दिया।
फिर हम आगे बढ़ते गए।
तभी अचानक हमें सड़क के किनारे एक चाय की टपरी खुली दिखाई दी।
मैं हैरान था, क्योंकि इतनी सुबह और इतनी ठंड में मैंने कभी किसी चाय की दुकान को खुला नहीं देखा था।
और अजीब बात यह थी कि वह टपरी हमें तब ही दिखाई दी जब हम उसके बिल्कुल पास पहुँच गए।
हम सब वहाँ रुके और चाय पी।
चाय पीने के बाद मेरे एक दोस्त ने कहा कि थोड़ा आगे उसके चाचा के घर के पास जामुन का पेड़ है।
हम सबने कहा,
"चलो, जामुन खाते हैं।"
लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे थे, हमने नोटिस किया कि वहाँ हमारे अलावा कोई नहीं था।
पूरा इलाका सुनसान था।
न कोई घर, न कोई पेड़… चारों तरफ सिर्फ खेत ही खेत थे।
अब हम सबको डर लगने लगा।
कुछ दोस्तों ने कहा,
"हमें वापस चलना चाहिए।"
लेकिन हमारा एक दोस्त आगे जाने की ज़िद कर रहा था।
आखिरकार हमने उसे समझाया और वापस लौटने का फैसला किया।
हमें नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला था…
लेकिन जो हुआ…
उसने हम सबका दिल दहला दिया।
👉 Part 3 जल्दी आने वाला है… 😱
👍 अगर आपको कहानी पसंद आई हो तो Like करें
🔔 और ऐसी ही रोमांचक कहानियों के लिए Subscribe जरूर करें
📝 Description में लिखें: "Part 3 जल्दी लाओ" ताकि अगला भाग जल्दी आए! 🚀
